बलरामपुर : 10 एकड़ वन भूमि पर कब्जे की साजिश नाकाम, फर्जी पट्टा मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार…
10 एकड़ वन भूमि पर कब्जे की साजिश नाकाम, फर्जी पट्टा मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार,
चलगली पुलिस की कार्रवाई, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी
बलरामपुर-रामानुजगंज,
जिले के चलगली थाना क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ वन भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कब्जा करने की कोशिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस ने फर्जी वन अधिकार पत्र तैयार कर वितरण करने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, वन परिक्षेत्र बलरामपुर के सर्किल मानिकपुर में पदस्थ वनपाल अनिल कुजूर की शिकायत पर थाना चलगली में अपराध क्रमांक 57/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
शिकायत में बताया गया कि 9 जुलाई 2026 को ग्रामीणों से सूचना मिली थी कि बीट मुरका के कक्ष क्रमांक पी-3493 स्थित वन भूमि पर ग्राम केरता निवासी शिवलाल द्वारा झोपड़ी बनाकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच के दौरान शिवलाल से भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया। इस दौरान उसने अपने, अपने पुत्र रामकुमार तथा पत्नी रमपतिया के नाम से जारी तीन वन अधिकार पत्र प्रस्तुत किए।
दस्तावेजों की जांच के दौरान वन विभाग को उनके फर्जी होने की आशंका हुई। पूछताछ में शिवलाल ने बताया कि उसने वर्ष 2025 में ग्राम कोटरकी निवासी रामशकल से 15 हजार रुपये देकर उक्त वन अधिकार पत्र बनवाए थे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच आदिवासी विकास विभाग और भू-अभिलेख कार्यालय के माध्यम से कराई गई, जिसमें यह पाया गया कि संबंधित वन अधिकार पत्र विभागीय अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं और न ही कार्यालय द्वारा जारी किए गए थे।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर करीब 4 हेक्टेयर (लगभग 10 एकड़) शासकीय वन भूमि का पट्टा तैयार कर धोखाधड़ी करने का प्रयास किया था।
विवेचना के दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने फर्जी पट्टों के निर्माण और वितरण में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस ने मामले में शिवलाल, रामकुमार, रामशकल, शंकरनाथ पाण्डेय और कुंजन रजक को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों को 25 सितंबर 2026 को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है तथा फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।