सूरजपुर : भैयाथान में जुटा कोईरी-कुशवाहा समाज… आठ अहम मुद्दों पर मंथन, संगठन की दिशा तय करने की तैयारी.. परिक्षेत्र अध्यक्ष के चुनाव से सामाजिक जनगणना और शुल्क व्यवस्था तक उठे सवाल… सरगुजा संभाग के कई जिलों से पहुंचे पदाधिकारी, अब फैसलों पर टिकी नजर..
सूरजपुर : भैयाथान में जुटा कोईरी-कुशवाहा समाज… आठ अहम मुद्दों पर मंथन, संगठन की दिशा तय करने की तैयारी.. परिक्षेत्र अध्यक्ष के चुनाव से सामाजिक जनगणना और शुल्क व्यवस्था तक उठे सवाल… सरगुजा संभाग के कई जिलों से पहुंचे पदाधिकारी, अब फैसलों पर टिकी नजर..
चंद्रिका कुशवाहा,सूरजपुर
कोईरी-कुशवाहा समाज को संगठनात्मक रूप से मजबूत, व्यवस्थित और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भैयाथान के मंगल भवन में महत्वपूर्ण सामाजिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरगुजा संभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों से समाज के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, परिक्षेत्र एवं क्षेत्र अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। बैठक में संगठन की वर्तमान व्यवस्था, भविष्य की कार्ययोजना और सामाजिक सरोकारों से जुड़े आठ महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य समाज को गांव से लेकर जिला और संभाग स्तर तक अधिक संगठित करना तथा सामाजिक निर्णयों में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।

बैठक में संभाग अध्यक्ष सुखदेव मुनि कुशवाहा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ संभाग उपाध्यक्ष रामनारायण कुशवाहा, संभाग सचिव ददई राम कुशवाहा और संभाग कोषाध्यक्ष सीताराम कुशवाहा सहित संभाग स्तर के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता सूरजपुर जिला अध्यक्ष सनलीत कुशवाहा ने की। उनके साथ जिला उपाध्यक्ष जवाहर कुशवाहा, जिला सहसचिव नरेंद्र कुशवाहा और अरविंद कुशवाहा सहित अन्य पदाधिकारियों ने बैठक के संचालन एवं चर्चा में भागीदारी निभाई।
बैठक का पहला प्रमुख विषय भैयाथान परिक्षेत्र अध्यक्ष का निर्वाचन रहा। समाज की स्थानीय संगठनात्मक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें सुनील कुशवाहा को भैयाथान परिक्षेत्र का नवनिर्वाचित अध्यक्ष बनाया गया। इस अवसर पर समाजजनों ने संगठन के प्रति जिम्मेदारी निभाने और क्षेत्र के गांवों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की अपेक्षा जताई। वहीं विनोद कुशवाहा सहित अन्य पदाधिकारियों की भूमिका को भी बैठक में महत्वपूर्ण माना गया।

दूसरा विषय पारिवारिक शुल्क से संबंधित रहा। समाज में परिवार स्तर पर लागू शुल्क व्यवस्था को लेकर स्पष्टता और एकरूपता की आवश्यकता पर विचार किया गया। इसके साथ ही सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए आर्थिक व्यवस्था पारदर्शी और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया। तीसरे विषय के रूप में वैवाहिक शुल्क पर चर्चा हुई। समाज में विवाह संबंधी सामाजिक व्यवस्थाओं को सरल और समान बनाने तथा इससे जुड़े शुल्क को लेकर स्पष्ट व्यवस्था तैयार करने की जरूरत सामने आई।
बैठक में चौथा और भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय सामाजिक जनगणना रहा। समाज के प्रत्येक गांव और परिवार की वास्तविक स्थिति, संख्या और सामाजिक भागीदारी का व्यवस्थित आंकड़ा तैयार करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। सामाजिक जनगणना को केवल संख्या जुटाने की प्रक्रिया के बजाय समाज की भविष्य की योजनाओं का आधार बनाने पर जोर दिया गया। इससे शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सहायता, संगठन विस्तार और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच बनाने जैसी योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पांचवां महत्वपूर्ण विषय सूरजपुर में कोईरी-कुशवाहा समाज के कार्यालय भवन निर्माण का रहा। समाज के स्थायी कार्यालय को संगठनात्मक गतिविधियों के लिए आवश्यक बताते हुए इसके निर्माण की दिशा में आगे की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। स्थायी कार्यालय उपलब्ध होने से सामाजिक बैठकों, दस्तावेजों के रखरखाव, कार्यकारिणी गतिविधियों और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में सुविधा होगी।
छठे बिंदु में वंचित ग्रामों के सदस्यों का चुनाव और संगठन में प्रतिनिधित्व प्रमुख विषय रहा। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि समाज की संगठनात्मक संरचना कुछ क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक ग्राम और क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिले। जिन गांवों में अभी तक संगठनात्मक गतिविधियां अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच पाई हैं, वहां सदस्यों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी देने की आवश्यकता बताई गई। इससे समाज की जमीनी पकड़ और एकजुटता मजबूत हो सकती है।
सातवें विषय में सामाजिक खान-पान से बहिष्कृत व्यक्तियों के मामलों पर चर्चा हुई। सामाजिक अनुशासन के साथ ऐसे मामलों को संवेदनशीलता, संवाद और निष्पक्षता के साथ देखने की आवश्यकता पर विचार किया गया। समाज के भीतर उत्पन्न विवादों का समाधान सामाजिक व्यवस्था और आपसी बातचीत के माध्यम से निकालने तथा अनावश्यक दूरी को कम करने की दिशा में प्रयास करने पर जोर दिया गया। समाज की एकजुटता बनाए रखने के लिए अनुशासन के साथ सामाजिक समरसता को भी महत्वपूर्ण माना गया।
आठवां विषय पूर्व जिला अध्यक्ष के कार्यकाल के रिकॉर्ड एवं राशि का प्रभार सौंपने से संबंधित रहा। बैठक में संगठन के पुराने दस्तावेज, आर्थिक हिसाब-किताब और पूर्व कार्यकाल की जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसे संगठन की पारदर्शिता, जवाबदेही और भविष्य की कार्यप्रणाली से जोड़कर देखा गया। रिकॉर्ड एवं आर्थिक प्रभार का व्यवस्थित हस्तांतरण होने से नई कार्यकारिणी को सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी।
सरगुजा संभाग के कई जिलों से पहुंचे पदाधिकारी, संगठन विस्तार को लेकर दिखी व्यापक भागीदारी
भैयाथान की इस बैठक में सूरजपुर के साथ-साथ कोरिया और सरगुजा जिले से भी समाज के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। कोरिया जिले से अध्यक्ष चंद्र प्रकाश कुशवाहा, दयाशंकर कुशवाहा, शीतला प्रसाद कुशवाहा, जगदीश प्रसाद कुशवाहा और प्रसीद कुशवाहा सहित अन्य समाजजन उपस्थित रहे। सरगुजा जिले से जिला अध्यक्ष प्रेमचंद कुशवाहा तथा उपाध्यक्ष कृष्ण पाल कुशवाहा सहित पदाधिकारियों ने सहभागिता की।
बैठक में भैयाथान क्षेत्र अध्यक्ष हरिवंश कुशवाहा सहित कामता कुशवाहा, बिजेंद्र कुशवाहा, विशेश्वर कुशवाहा, सुशील कुशवाहा, देवनारायण कुशवाहा, शंकर कुशवाहा और राम लखन कुशवाहा सहित अनेक समाजजनों की उपस्थिति रही। सूरजपुर एवं संभागीय संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखी।
बैठक की खास बात यह रही कि इसमें केवल पद और निर्वाचन की चर्चा तक विषय सीमित नहीं रहे, बल्कि समाज की दीर्घकालीन संगठनात्मक जरूरतों को भी सामने रखा गया। सामाजिक जनगणना से लेकर कार्यालय भवन, वंचित ग्रामों को संगठन से जोड़ने, शुल्क व्यवस्था और सामाजिक विवादों के समाधान जैसे मुद्दे सीधे तौर पर समाज की भविष्य की दिशा से जुड़े हैं।
संभाग अध्यक्ष सुखदेव मुनि कुशवाहा के मार्गदर्शन और जिला अध्यक्ष सनलीत कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई चर्चा में इस बात की आवश्यकता सामने आई कि समाज की ताकत को केवल संख्या तक सीमित न रखकर संगठनात्मक भागीदारी में बदला जाए। गांव स्तर पर मजबूत प्रतिनिधित्व, सही सामाजिक आंकड़े और पारदर्शी आर्थिक व्यवस्था किसी भी सामाजिक संगठन की स्थायी मजबूती के लिए जरूरी माने गए।
बैठक में नवनिर्वाचित भैयाथान परिक्षेत्र अध्यक्ष सुनील कुशवाहा के सामने क्षेत्र के समाजजनों को संगठित करने और संगठन को सक्रिय बनाने की जिम्मेदारी भी सामने आई। वहीं संभाग, जिला, परिक्षेत्र और क्षेत्र स्तर के पदाधिकारियों की सामूहिक उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि समाज अपने संगठनात्मक ढांचे को व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
कुल मिलाकर भैयाथान की यह सामाजिक बैठक कोईरी-कुशवाहा समाज के लिए केवल एक बैठक नहीं, बल्कि संगठन को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में सामने आई। आठ बिंदुओं पर हुई चर्चा में नेतृत्व, आर्थिक व्यवस्था, सामाजिक जनगणना, भवन निर्माण, ग्राम स्तर पर प्रतिनिधित्व, सामाजिक समरसता और जवाबदेही जैसे विषय प्रमुख रहे। अब इन विषयों को बैठक की चर्चा से आगे ले जाकर ठोस निर्णय और समयबद्ध कार्ययोजना में बदलना समाज के सामने अगली बड़ी चुनौती होगी। यही कार्ययोजना समाज की एकजुटता, पारदर्शिता और संगठनात्मक मजबूती को आने वाले समय में नई पहचान दे सकती है।