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बलरामपुर : शिक्षक की कमी से मूरकौल में बच्चे सड़क पर, भरुहीबांस में मनोज गुप्ता की बहाली को लेकर 27 विद्यार्थियों का टेंट में धरना….

शिक्षक की कमी से मूरकौल में बच्चे सड़क पर, भरुहीबांस में मनोज गुप्ता की बहाली को लेकर 27 विद्यार्थियों का टेंट में धरना,

दोनों स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; बच्चों ने कहा—“मनोज सर की बहाली तक स्कूल नहीं जाएंगे”

वाड्रफनगर/बलरामपुर,

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर दो अलग-अलग स्कूलों से सामने आई तस्वीरों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मूरकौल हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई है। वहीं भरुहीबांस माध्यमिक शाला में शिक्षक मनोज गुप्ता को हटाए जाने के विरोध में 27 छात्र-छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर सड़क किनारे टेंट लगाकर विरोध शुरू कर दिया है।

मूरकौल में शिक्षकों की कमी, पढ़ाई प्रभावित,,

मूरकौल हायर सेकेंडरी स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी की समस्या बताए जाने के बावजूद पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का आरोप ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने लगाया है। उनका कहना है कि आवश्यक संख्या में शिक्षक नहीं होने के कारण नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों को विषयवार पढ़ाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की बात करती है, लेकिन स्कूल में शिक्षकों की कमी जैसी मूलभूत समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।

भरुहीबांस में मनोज गुप्ता को हटाने का विरोध,

भरुहीबांस माध्यमिक शाला में शिक्षक मनोज गुप्ता को हटाए जाने के विरोध में 27 विद्यार्थियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। विद्यार्थी स्कूल परिसर के बजाय सड़क किनारे टेंट लगाकर अपनी मांग को लेकर बैठे हैं।

विद्यार्थियों का कहना है कि मनोज गुप्ता बेहतर तरीके से पढ़ाते थे और उनकी पढ़ाई से वे संतुष्ट थे। उनके हटाए जाने के बाद विद्यार्थियों में नाराजगी है। प्रदर्शन कर रहे बच्चों ने कहा है कि “जब तक मनोज सर की बहाली नहीं होगी, हम स्कूल नहीं जाएंगे।”

विद्यार्थियों ने लिखित बयान में लगाए आरोप,

3 सितंबर 2026 को विद्यार्थियों द्वारा दिए गए हस्तलिखित बयान में स्कूल में पदस्थ दोनों महिला शिक्षकों पर मनोज गुप्ता के खिलाफ झूठा आरोप लगाए जाने का दावा किया गया है। विद्यार्थियों ने अपने बयान में मनोज गुप्ता को बेहतर ढंग से पढ़ाने वाला शिक्षक बताते हुए उनकी बहाली की मांग की है।

हालांकि, विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले में शिक्षा विभाग का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

27 विद्यार्थियों ने दिए नाम और हस्ताक्षर,

मनोज गुप्ता की बहाली की मांग को लेकर दिए गए लिखित बयान में निरंजन, सूरज, राजेश, जय, सूर्यसागर, देबराज, संगम, आकांक्षा, रीक्ष्भा, निर्जला, सपना, दिव्या, फूलकुमारी, प्रतिभा, सीमा, राजकुमारी, प्रामिला, अंकित, अमान अंसारी, संतोष, अनुप, विकाश, मौसम, विमलेश, मनोज, महेश और आहित सहित 27 विद्यार्थियों के नाम और हस्ताक्षर बताए गए हैं।

सड़क किनारे टेंट में बैठे बच्चे,

भरुहीबांस में विद्यार्थियों का स्कूल से बाहर टेंट लगाकर बैठना शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस उम्र में बच्चों को कक्षा में बैठकर पढ़ाई करनी चाहिए, वे अपनी मांग को लेकर सड़क किनारे धरने पर बैठे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ तो बच्चों की पढ़ाई और प्रभावित होगी। उन्होंने शिक्षा विभाग से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि एक स्कूल में शिक्षक की कमी से बच्चे परेशान हैं, जबकि दूसरे स्कूल में शिक्षक की बहाली की मांग को लेकर बच्चे स्कूल छोड़कर आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों ने मूरकौल में आवश्यक संख्या में शिक्षकों की पदस्थापना करने तथा भरुहीबांस में मनोज गुप्ता को हटाए जाने के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मूरकौल में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई और भरुहीबांस में मनोज गुप्ता की बहाली को लेकर समाधान नहीं निकाला गया, तो दोनों गांवों के बच्चे और ग्रामीण एकजुट होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर घेराव करेंगे।

बीईओ बोले—जानकारी मिली है, टीम भेजी जा रही,

मामले को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर जायसवाल से बात की गई। उन्होंने कहा कि बच्चों के हड़ताल पर बैठने की जानकारी मिली है और मौके पर टीम भेजी जा रही है।

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग दोनों स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है। एक ओर शिक्षक की कमी से विद्यार्थी परेशान हैं, तो दूसरी ओर शिक्षक की बहाली की मांग को लेकर बच्चे सड़क पर बैठे हैं। ऐसे में दोनों स्कूलों में पढ़ाई कब सामान्य होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

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