रायपुर : नवजात शिशुओं की सुरक्षा और बेहतर देखभाल के लिए 88 स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण….
नवजात शिशुओं की सुरक्षा और बेहतर देखभाल के लिए 88 स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण…
रायपुर/खैरागढ़-छुईखदान-गंडई,
जिले में नवजात मृत्यु दर में कमी लाने और जन्म के तुरंत बाद शिशुओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से जिला स्तरीय नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (NSSK) प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़े 88 स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात देखभाल, पुनर्जीवन, संक्रमण से बचाव तथा सुरक्षित रेफरल व्यवस्था संबंधी प्रशिक्षण दिया गया।

जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शुक्ला के मार्गदर्शन तथा श्रीमती सोनल ध्रुव के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में चिकित्सा अधिकारी, आरबीएसके चिकित्सा अधिकारी, आयुष चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं स्टाफ नर्सों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को जन्म के बाद नवजात शिशुओं की आपात एवं आवश्यक देखभाल के लिए दक्ष बनाना था।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने नवजात में खतरे के संकेतों की पहचान पर विशेष जोर दिया। प्रतिभागियों को बताया गया कि यदि शिशु में तेज सांस चलना, सुस्ती, दूध न पीना, छाती धंसना या शरीर ठंडा पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल उपचार और सुरक्षित रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

व्यावहारिक सत्र में डमी (मैनिकिन) के माध्यम से जन्म के तुरंत बाद सांस नहीं लेने वाले नवजात के पुनर्जीवन की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। साथ ही कम वजन एवं समय से पूर्व जन्मे शिशुओं के लिए कंगारू मदर केयर (KMC) के महत्व और लाभों की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने समुदाय में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने तथा माताओं और परिवारों को सही जानकारी देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने, छह माह तक केवल स्तनपान कराने, नाभि की स्वच्छ देखभाल तथा हाइपोथर्मिया से बचाव को नवजात सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
प्रशिक्षण का संचालन यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के तकनीकी मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशीष शर्मा एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीतू बनपुरिया ने भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों से संस्थागत प्रसव के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने तथा समुदाय में नवजात सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
कार्यक्रम का सफल समन्वय जिला डाटा प्रबंधक खिलेश साहू एवं उनकी टीम द्वारा किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से जिले में नवजात शिशुओं की सुरक्षा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और मजबूती मिलेगी।